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उत्तराखंड की मिट्टी से निकली एक ऐसी आवाज़, जिसे दुनिया सुन रही है!

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 उत्तराखंड के पहाड़ों की गोद में पली-बढ़ी ज़िंदगी, जो शहर की चकाचौंध से कहीं दूर, अपनी जड़ों से जुड़ी है। आइए, एक ऐसी ही कहानी सुनते हैं... "मृदुला का सपना: पहाड़ की बेटी, अपनी उड़ान" उत्तराखंड के चमोली ज़िले में एक छोटा सा गाँव था, जहां सूरज की पहली किरणें देवदार के पेड़ों से छनकर आती थीं और अलकनंदा की कल-कल धारा पूरे वातावरण में संगीत घोल देती थी। इसी गाँव में मृदुला का जन्म हुआ। उसके पिता, मोहन सिंह, एक छोटे किसान थे और माँ, गंगा देवी, घर के साथ-साथ थोड़ा-बहुत बुनाई का काम भी करती थीं। मृदुला बचपन से ही अलग थी। जहाँ गाँव की बाकी लड़कियाँ शादी और चूल्हे-चौके के सपनों में खोई रहती थीं, वहीं मृदुला की आँखें पहाड़ों से भी ऊँचे सपने देखती थीं। उसे याद था कैसे हर सुबह वह स्कूल जाने के लिए कई किलोमीटर पैदल चलती, और रास्ते में पड़ने वाले खूबसूरत नज़ारों को अपनी डायरी में उतार लेती। उसे कहानियाँ लिखने का शौक था, खासकर अपने पहाड़ की, यहाँ के लोगों की, और उनके संघर्षों की। गाँव में दसवीं पास करना ही बहुत बड़ी बात मानी जाती थी, और लड़के-लड़कियों को अक्सर खेत-खलिहान या परिवार के काम मे...

एक राजा की वो कहानी, जिसने हमें पितृ पक्ष का असली मतलब सिखाया!

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  पितृ पक्ष: सिर्फ़ पूजा नहीं, दिल का रिश्ता है कभी सोचा है, वो कौन सी सोलह रातें हैं जब हम अपने पूर्वजों को सबसे ज़्यादा याद करते हैं? वो समय है पितृ पक्ष का। ये सिर्फ़ पूजा-पाठ नहीं है, बल्कि एक मौका है अपने उन अपनों को दिल से याद करने का, जो अब इस दुनिया में नहीं हैं। एक राजा की कहानी, जिसने हमें यह सीख दी कहानी है महाभारत के महान योद्धा कर्ण की। जब वो दुनिया छोड़कर स्वर्ग पहुँचे, तो उन्हें खाने को सोना दिया गया। हैरान होकर कर्ण ने पूछा, "ये क्या हो रहा है? मुझे भोजन के बजाय सोना क्यों मिल रहा है?" देवराज इंद्र ने मुस्कुराकर जवाब दिया, "कर्ण, तुमने जीवन भर सिर्फ़ सोने का दान किया। तुम इतने दानी थे कि तुमने कभी किसी भूखे को खाना नहीं खिलाया, क्योंकि तुम्हारे पास बस सोने का भंडार था।" कर्ण ने दुःखी होकर कहा, "लेकिन देव! मैं तो अनाथ था। मुझे अपने माता-पिता और पूर्वजों का पता ही नहीं था, तो मैं उनके लिए दान कैसे करता?" कर्ण की बात सुनकर देवताओं का दिल पिघल गया। उन्होंने उसे 16 दिनों के लिए वापस धरती पर भेजा। इन 16 दिनों में, कर्ण ने अपने पूर्वजों को याद किया, ...

क्या आप भी 'दिखावे' के चक्कर में अपनी सैलरी उड़ा रहे हैं?

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 यार, ये लकी भास्कर वाला सीन सिर्फ़ फ़िल्म की कहानी नहीं है, ये तो अपनी लाइफ की लाइव रिकॉर्डिंग है। सच कहूँ तो, 25 से 35 की उम्र में ये सब सबसे ज़्यादा होता है। असली स्कैम: हमारा अपना ईगो और FOMO Let's be real, अपनी इस उम्र में दिखावा हमारी सबसे बड़ी कमज़ोरी बन जाता है। दोस्त ने नई कार ली, तो हमें भी चाहिए। Instagram पर किसी को विदेश में छुट्टियां मनाते देखा, तो हमें भी उसी vibe में जाना है। हमें लगता है कि अगर हमारे पास भी वो चीज़ें नहीं हुईं, तो हम पीछे रह जाएँगे। और यही है असली स्कैम। इसे कहते हैं Ego-Driven Spending यानी अहम्-प्रेरित ख़रीदारी। और इसका दूसरा नाम है FOMO – Fear of Missing Out । उस ज्वेलरी शॉप के मालिक ने कुछ ख़ास नहीं किया। उसने बस भास्कर की असुरक्षा को ट्रिगर किया और लाखों का प्रॉडक्ट बेच दिया। उसने भास्कर के मन में ये डर भर दिया कि वो बाकियों से कम है। और इस डर को ख़त्म करने के लिए भास्कर ने वो सब किया जो उसकी ज़रूरत ही नहीं थी। आज हम भी यही करते हैं। हम अपनी सैलरी का बड़ा हिस्सा सिर्फ़ इसलिए खर्च कर देते हैं ताकि हम दूसरों की नज़रों में 'लगज़री लाइफ' जी सके...

Uttarkashi Cloudburst: क्या होता है बादल फटना और पहाड़ी इलाकों में ही क्यों फटते हैं सबसे ज्यादा बादल? जानें हर सवाल का जवाब

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उत्तराखंड के उत्तरकाशी जिले में हरसिल के पास धराली गांव में मंगलवार को बादल फटने से अचानक बाढ़ आ गई, जिसमें कई घर बह गए और कई लोगों के लापता होने की आशंका है। फिलहाल इस हादसे में 4 लोगों की मौत की खबर है और कई होटल बह गए हैं। खीर गंगा नदी के बढ़ते पानी ने घरों को अपनी चपेट में ले लिया और भीषण तबाही मचाई। तस्वीरों में देखा जा सकता है कि पहाड़ी से नीचे की ओर तेजी से सैलाब आता है और इमारतों को तहस-नहस कर देता है। जबकि आसपास खड़े लोग निवासियों को बाहर निकलने के लिए चिल्ला रहे थे। भूस्खलन दोपहर करीब 1:45 बजे धराली गांव के पास हुआ, जो हर्षिल में भारतीय सेना कैंप से मात्र 4 Km दूर है। धराली गंगोत्री जाने वाले रास्ते में एक मुख्य पड़ाव है और यहां कई होटल, रेस्टोरेंट और होमस्टे हैं। स्थानीय लोगों ने बताया कि खीर गंगा नदी के जलग्रहण क्षेत्र यान कैचमेंट एरिया में बादल फटने से ये विनाशकारी बाढ़ आई। उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि सरकार ने बचाव कार्यों के लिए इमरजेंसी रेस्क्यू टीमें तैनात कर दी हैं। खोज और बचाव कामों में मदद के लिए सेना भी इलाके में पहुंच गई है। ये त...

हल्द्वानी-: यह है धरती के देव. ऑटो चालक ने विवाह मंडप में पहुंचकर आभूषणों का खोया बैग सौंपा.बेटी को भी दिया आशीर्वाद।।

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  हल्द्वानी : उत्तराखंड को यूंही देवभूमि नहीं कहा जाता यहां मानव के रूप में भी देव समान व्यक्ति भी निवास करते हैं इसका जीता जागता उदाहरण यहां हल्द्वानी में देखने को मिला जब एक ऑटो चालक ने अपनी ईमानदारी की मिसाल पेश करते हुए विवाह समारोह में लाखों रुपए से भरे बैग को लौटा कर लोगों के दिल में खुशियां भर दी वाक्या हल्द्वानी शहर का है घर में बिटिया की शादी और बारात घर के दरवाजे पर आ गई लेकिन दूलहन के गहने गायब हो गये जेवरात गायब होने पर पूरे घर में हड़कंप मंच गया और शादी की खुशी में अफरातफरी का माहौल बदल गई लेकिन अचानक आँटो सीधे अपना ऑटो लेकर जब मंडप में पहुंचा तो घर में खुशियों की शहनाई गूंज उठी। । मामला नैनीताल जिले के हल्द्वानी का है जहां एक ऑटो ड्राइवर ने ऐसी इमानदारी की मिसाल पेश की कि हर कोई खुशी में झुम उठा दरअसल शुक्रवार को हल्द्वानी के मुखानी में एक शादी थी परिवार वाले 6 लाख ज्वेलरी खरीदा ऑटो से बैंकट हॉल पहुंचे लेकिन ज्वेलरी का बैग आँटो में छूट गया। इस दौरान ऑटो चालक कीर्ति बल्लभ जोशी ऑटो लेकर अपने घर चला गया जहां दोपहर खाना खाने के बाद जब ऑटो के पीछे एक बैग दिखा दो उसमें जेवर...

दुनिया का सबसे अच्छा खाना कौन सा है?

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  दुनिया का सबसे अच्छा खाना कौन सा है?   8,000 वर्षों के इतिहास के साथ, भारतीय भोजन शायद दुनिया के सबसे लोकप्रिय व्यंजनों में से एक है। सब्जियों का प्रचलन और भरपूर मसालेदार भोजन शाकाहारी संस्कृति का प्रतिनिधित्व करते हैं। भारतीय व्यंजनों में महत्वपूर्ण, यह व्यंजन भारतीय मसालों, चिकन के बड़े टुकड़े, नरम अप्पम (एक प्रकार का पैनकेक) और नारियल की चटनी से बना है। बंजारी गोश्त मांस, दही और असली राजस्थानी स्वाद एक ही डिश में लाजवाब है। भापा आलू यह व्यंजन, जो तैयार करने में अपेक्षाकृत आसान है, बेहतरीन स्वाद है। हम अत्यधिक सुझाव देते हैं कि आप इस स्वादिष्ट आलू, पंचफोरन, नारियल पेस्ट और सरसों के तेल की रेसिपी को आजमाएँ। बटर चिकन

बाजार जाना है खरीदारी करने देख ले हल्द्वानी का ट्रैफिक प्लान

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  नोट:- दिनांक 22 अक्टूबर 2022 से 25 अक्टूबर 2022 तक प्रातः 9:00 बजे से रात्रि 9:00 बजे तक लागू रहेगा रामपुर रोड रामपुर रोड से आने वाले एवं पर्वतीय क्षेत्रों को जाने वाले समस्त बडे़ वाहनों को टीपी नगर तिराहे से डायवर्ट कर तीनपानी गौला बाईपास तिराहे से गौला रोड होते हुए काठगोदाम की ओर भेजा जायेगा। जहॉ से वह अपने गन्तव्य को जायेंगे। रामपुर रोड से आने वाली समस्त रोडवेज /निजी/सिडकुल की बसों को टीपी नगर तिराहे से डायवर्ट कर तीनपानी गौला बाईपास तिराहे से गौला रोड होते हुए काठगोदाम से पर्वतीय क्षेत्र एवं हल्द्वानी की ओर भेजा जायेगा।  रामपुर रोड की ओर से आने वाले एवं पर्वतीय क्षेत्रों को जाने वाले समस्त छोटे वाहनों को आई0टी0आई0 तिराहा से डायवर्ट कर मुखानी चौराहे होते हुए पनचक्की तिराहा, हाईडिल तिराहा, कॉलटैक्स तिराहा होते हुए नैनीताल रोड/भीमताल रोड की ओर भेजा जायेगा। बरेली रोड बरेली रोड से आने वाले समस्त बडे वाहनों को तीनपानी गौला बाईपास तिराहे से डायवर्ट कर गौला बाईपास रोड होते हुए काठगोदाम की ओर भेजा जायेगा। जहॉ से वह अपने गन्तव्य को जायेंगे।  बरेली रोड से आने वाली रोडवेज की बस...