उत्तराखंड की मिट्टी से निकली एक ऐसी आवाज़, जिसे दुनिया सुन रही है!
उत्तराखंड के पहाड़ों की गोद में पली-बढ़ी ज़िंदगी, जो शहर की चकाचौंध से कहीं दूर, अपनी जड़ों से जुड़ी है। आइए, एक ऐसी ही कहानी सुनते हैं... "मृदुला का सपना: पहाड़ की बेटी, अपनी उड़ान" उत्तराखंड के चमोली ज़िले में एक छोटा सा गाँव था, जहां सूरज की पहली किरणें देवदार के पेड़ों से छनकर आती थीं और अलकनंदा की कल-कल धारा पूरे वातावरण में संगीत घोल देती थी। इसी गाँव में मृदुला का जन्म हुआ। उसके पिता, मोहन सिंह, एक छोटे किसान थे और माँ, गंगा देवी, घर के साथ-साथ थोड़ा-बहुत बुनाई का काम भी करती थीं। मृदुला बचपन से ही अलग थी। जहाँ गाँव की बाकी लड़कियाँ शादी और चूल्हे-चौके के सपनों में खोई रहती थीं, वहीं मृदुला की आँखें पहाड़ों से भी ऊँचे सपने देखती थीं। उसे याद था कैसे हर सुबह वह स्कूल जाने के लिए कई किलोमीटर पैदल चलती, और रास्ते में पड़ने वाले खूबसूरत नज़ारों को अपनी डायरी में उतार लेती। उसे कहानियाँ लिखने का शौक था, खासकर अपने पहाड़ की, यहाँ के लोगों की, और उनके संघर्षों की। गाँव में दसवीं पास करना ही बहुत बड़ी बात मानी जाती थी, और लड़के-लड़कियों को अक्सर खेत-खलिहान या परिवार के काम मे...